धर्म नगरी काशी के विश्वनाथ गुरुकुल संस्कृत महाविद्यालय में अध्ययन के साथ – साथ श्रेष्ठ गुरुजनों का आशीर्वाद एवं परम पूज्य पिता जी का स्नेह व सानिध्य प्राप्त होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। आचार्य जी बचपन से ही गुरुकुलों में रहकर धार्मिक गतिविधियों से जुड़े रहे। आज आचार्य जी के पास 37 सालों से अधिक का अनुभव है।