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उपनयन संस्कार
उपनयन संस्कार
यह हिन्दू धर्म का दसवां और प्रमुख संस्कार है। जिसमें पवित्र धागा धारण कराया जाता है। जिसका अर्थ है 'पास लाना'गुरु के सानिध्य में शास्त्रों और ब्रह्म के निकट लाता है। इससे वेदों के अध्ययन और पवित्र गायत्री मंत्र के दीक्षा का अधिकार प्राप्त होता है। बच्चों में अनुशासन और जीवन भर ज्ञान प्राप्त करने व नैतिक मूल्यों को बनाए रखने की शक्ति देता है।


महामृत्युंजय जप
यह मंत्र जीवन में सुरक्षा, स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए अत्यंत लाभकारी है। मृत्यु और नश्वरता के बंधन से मुक्ति प्रदान करता है।
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कुण्डली




रुद्राभिषेक
जीवन की बाधाओं, रोगों और भय को दूर करने तथा सुख, समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति करने के लिए किया जाता है। रुद्राभिषेक से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है। यह पूजा नकारात्मक विचारों और ऊर्जाओं को नष्ट कर देती है जिससे मन और आत्मा को शांति मिलती है।


गृह वास्तु पूजन
यह पूजा घर में सकारात्मक ऊर्जा लाने और सुख, स्वास्थ्य, धन और समृद्धि के लिए की जाती है। इस पूजा से नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है जिससे घर में धन-दौलत, सुख और खुशहाली आती है।
दुर्गा पाठ से मनोकामनाओं की पूर्ति,साहस और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होता है। शत्रुओं पर विजय प्राप्त एवं बड़े संकट का निवारण होता है जिससे धन,यश, नौकरी, भूमि व वाहन आदि मनोकामनाएं पूरी होती है।
दुर्गा पाठ




नवग्रह शांति पूजा
जीवन में नकारात्मक प्रभावों का शमन होता है साथ ही व्यक्तिगत और व्यावसायिक सम्बन्धों में सामंजस्य स्थापित होता है। सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है जिससे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है और सफलता एवं उन्नति करता है ।


मूल शांति
ज्योतिषशास्त्र में मूल नक्षत्र में जन्म लेने वाले को बेहतर भविष्य बनाने और उनके अशुभ प्रभावों को कम करने के लिए मूल शांति की जाती है । ज्योतिष शास्त्र में मूल नक्षत्र को अशुभ माना जाता है । मूल नक्षत्र का सबसे अधिक नकारात्मक प्रभाव होता है ।
नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करने के लिए शांति पूजा किया जाता है।
पितृदोष एवं शनि केतु श्रापित दोष निवारण




मांगलिक दोष शांति पूजा
वैवाहिक एवं दाम्पत्य जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए पूजा,जप और हवन किया जाता है।


गया श्राद्ध, त्रिपिंडी श्राद्ध, महालय श्राद्ध
गया जी में श्राद्ध करने से पूर्वजों की आत्मा को मोक्ष और शांति मिलती है। गया श्राद्ध करने वाला पूर्वजों के ऋण से एवं पितृ ऋण से मुक्त हो जाता है।
गोदान करने से पाप, ताप नष्ट होता है एवं भगवान नारायण का सानिध्य प्राप्त होता है।
गोदान



